Wednesday, June 10, 2026

योगी का बड़ा ऐलान! अब 75 जिलों में मिलेगी बच्चों को शिक्षा सहायता

उत्तर प्रदेश में बाल श्रमिक विद्या योजना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आर्थिक तंगी की वजह से कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसी उद्देश्य के तहत अब बाल श्रमिक विद्या योजना को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में लागू किया जाएगा।

लखनऊ में शनिवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिक कल्याण, कौशल विकास और रोजगार सृजन को लेकर कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रमिक प्रदेश की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत हैं। इसलिए सरकार का प्रयास है कि श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर जीवन, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।

 

मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को स्कूलों से जोड़ा जाए। साथ ही पुनर्वास की प्रक्रिया को भी मजबूत बनाया जाए। सरकार निजी क्षेत्र के सहयोग से बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना भी तैयार करेगी ताकि भविष्य में उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें।

बाल श्रमिक विद्या योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी। इस योजना के तहत 8 से 18 वर्ष तक के कामकाजी बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाने के साथ आर्थिक सहायता भी दी जाती है। अभी तक यह योजना प्रदेश के 20 जिलों में संचालित थी, लेकिन अब इसे नए प्रावधानों के साथ सभी 75 जिलों में लागू करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को भी रोजगार और जनसुविधा का अभिनव मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित सेवाएं युवाओं और कुशल कामगारों के लिए नए अवसर तैयार कर रही हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2021 से संचालित इस व्यवस्था के तहत लोग मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

वर्तमान में पोर्टल पर 1097 सेवा प्रदाता, 5049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं। मुख्यमंत्री ने सरकारी विभागों में भी सेवामित्र व्यवस्था के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उनका मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।

बैठक में श्रम विभाग के संस्थागत सुधारों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि प्रदेश में अब तक 32,583 कारखानों का पंजीकरण हो चुका है। मार्च 2017 तक यह संख्या 14,176 थी, जबकि अप्रैल 2017 के बाद 18,407 नए कारखाने पंजीकृत हुए। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अकेले 4860 कारखानों का पंजीकरण किया गया।

मुख्यमंत्री योगी ने औद्योगिक शहरों में श्रमिक सुविधा केंद्र विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘लेबर अड्डों’ को केवल श्रमिकों के एकत्रीकरण स्थल के रूप में नहीं बल्कि श्रमिक सहायता केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके साथ ही बाहर से आने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आवास सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

कानपुर में प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास योजना को मुख्यमंत्री ने कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की मांग है।

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