गाजियाबाद में प्रदूषण का कहर, लोनी-वेद विहार की हवा बेहद खराब
गाजियाबाद वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। जिले के कई इलाकों में हवा खराब और बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा खराब हालात लोनी और वेद विहार क्षेत्र में देखने को मिले, जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया।
गाजियाबाद वायु प्रदूषण को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित विभाग लगातार दावे कर रहे हैं, लेकिन लोगों को अब तक राहत नहीं मिल सकी है। सड़क की धूल, निर्माण कार्य और बढ़ते वाहनों को प्रदूषण का बड़ा कारण माना जा रहा है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार लोनी का एक्यूआई 350 और वेद विहार का 349 दर्ज किया गया। दोनों क्षेत्र बेहद खराब श्रेणी में रहे। वहीं इंदिरापुरम, गोविंदपुरम और वसुंधरा की हवा भी खराब श्रेणी में दर्ज की गई। संजय नगर का एक्यूआई मध्यम श्रेणी में रहा।
गाजियाबाद वायु प्रदूषण का असर लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। डॉक्टरों का कहना है कि खराब हवा के कारण सांस, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का ठीक से पालन नहीं हो रहा है। कई जगहों पर खुले में निर्माण सामग्री पड़ी रहती है, जिससे हवा में धूल बढ़ रही है। इसके अलावा सड़कों की सफाई और पानी के छिड़काव में भी कमी बताई जा रही है।
गाजियाबाद वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सीएक्यूएम ने संबंधित विभागों को कई निर्देश दिए हैं। इनमें निर्माण स्थलों पर जालियां लगाने, पानी का छिड़काव करने और खुले में मलबा न छोड़ने जैसे कदम शामिल हैं। हालांकि जमीन पर इन नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि संबंधित विभागों को प्रदूषण रोकने के लिए पत्र भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी लापरवाही जारी रहती है तो इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी।
गाजियाबाद वायु प्रदूषण के बीच लोगों ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खराब हवा के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है और सुबह-शाम बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार हरित क्षेत्र बढ़ाने और धूल नियंत्रण के उपायों पर जोर दे रहे हैं।
