उन्नाव के दो गांव बनेंगे वेटलैंड, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
उन्नाव वेटलैंड परियोजना के तहत बांगरमऊ तहसील के दो गांवों को वेटलैंड के रूप में विकसित और संरक्षित किया जाएगा। सरकार ने मेला रामकुंवर और कुशराजपुर ग्राम पंचायतों को आर्द्रभूमि घोषित करने का फैसला लिया है। इस पहल का उद्देश्य जल संरक्षण, हरियाली बढ़ाना और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देना है।
उन्नाव वेटलैंड परियोजना के अंतर्गत लगभग 97 बीघा क्षेत्र में फैले तीन प्रमुख जलस्रोतों को संरक्षित किया जाएगा। इन तालाबों के संरक्षण से पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि इससे सालभर पानी का स्तर बनाए रखने और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

मेला रामकुंवर ग्राम पंचायत में करीब 52 बीघा क्षेत्र में फैला बड़ा तालाब मौजूद है। इसके अलावा यहां 25 बीघा का चकरा तालाब भी स्थित है। हालांकि इन तालाबों के कई हिस्सों पर अतिक्रमण कर खेती की जा रही है। प्रशासन के सामने इन अवैध कब्जों को हटाना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
उन्नाव वेटलैंड परियोजना में कुशराजपुर गांव के भिलोई तालाब और ज्वार तालाब को भी शामिल किया गया है। इनका कुल क्षेत्रफल लगभग 20 बीघा बताया जा रहा है। फिलहाल यहां मत्स्य विभाग के पट्टे पर कार्य हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वेटलैंड मानकों के अनुसार यहां बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र की चिकनी और दोमट मिट्टी जल संरक्षण के लिए काफी उपयुक्त है। चिकनी मिट्टी के कारण तालाबों में पानी लंबे समय तक ठहर सकेगा। वहीं दोमट मिट्टी हरियाली और पौधारोपण के लिए बेहतर मानी जाती है। इससे पूरे इलाके में हरित वातावरण विकसित होने की संभावना है।
उन्नाव वेटलैंड परियोजना को पर्यटन से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यह पूरा क्षेत्र गंगा नदी से करीब छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर योजना सफल होती है तो गंगा तलहटी का यह इलाका प्राकृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
कुशराजपुर गांव में पर्यटन विभाग पहले ही देवी फूलमती मंदिर का जीर्णोद्धार करा चुका है। ऐसे में वेटलैंड विकसित होने के बाद धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
उन्नाव वेटलैंड परियोजना के जरिए पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भूजल स्तर सुधारने की भी कोशिश की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि जलस्रोतों को संरक्षित करने से आने वाले समय में जल संकट की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर तालाबों का सही तरीके से संरक्षण हुआ तो गांवों में हरियाली बढ़ेगी और पर्यटन के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं प्रशासन अब अतिक्रमण हटाने और पौधारोपण की तैयारी में जुट गया है।
