छात्र नेता से CM तक, डीके शिवकुमार का लंबा राजनीतिक सफर
डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने की चर्चा के बीच कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सिद्दारमैया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है। लंबे समय से पार्टी के संकटमोचक माने जाने वाले शिवकुमार का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर अब मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गया है।
डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने की खबर के बाद बेंगलुरु समेत कई जगहों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। समर्थकों ने मिठाइयां बांटी और मंदिरों में पूजा-अर्चना की। पार्टी के भीतर भी इसे संगठन और नेतृत्व के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।

डीके शिवकुमार ने 18 साल की उम्र में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई से राजनीति में कदम रखा था। 1981 से 1983 तक वह बेंगलुरु जिला एनएसयूआई के अध्यक्ष रहे। इसके बाद उन्होंने युवा कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई और धीरे-धीरे संगठन में मजबूत पकड़ बना ली।
1985 में कांग्रेस ने उन्हें सथानूर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। उस समय उनका मुकाबला पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा से हुआ था। हालांकि वह चुनाव हार गए, लेकिन उनकी राजनीतिक पहचान मजबूत हुई। 1989 में वह पहली बार विधायक चुने गए और यहीं से उनका सक्रिय राजनीतिक सफर आगे बढ़ा।
डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने से पहले कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उन्होंने शहरी विकास, ऊर्जा और सहकारिता जैसे विभागों में मंत्री के रूप में काम किया। कांग्रेस संगठन में भी उनका प्रभाव लगातार बढ़ता गया। राजनीतिक संकट के समय विधायकों को एकजुट रखने में उनकी भूमिका को काफी अहम माना जाता है।
1994 में कांग्रेस से टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इस जीत ने उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक ताकत को और मजबूत किया। बाद में उन्होंने कांग्रेस में वापसी कर पार्टी संगठन में अपनी पकड़ और मजबूत की।
डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं के बीच उनके पुराने विवाद भी चर्चा में हैं। 2017 में आयकर विभाग ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। वहीं 2019 में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था। हालांकि जेल से बाहर आने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया था।
2020 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया। इसके बाद उन्होंने राज्य में पार्टी को मजबूत करने पर फोकस किया। 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में भी उनकी बड़ी भूमिका मानी गई।
डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने की चर्चा के साथ राजनीतिक विश्लेषक उनके सामाजिक समीकरणों को भी अहम मान रहे हैं। उन्होंने वोक्कालिगा समुदाय के साथ-साथ पंचमसाली लिंगायत समाज में भी प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की। इसे भाजपा और जेडीएस के सामाजिक समीकरणों के मुकाबले की रणनीति माना जा रहा है।
अब कांग्रेस के भीतर माना जा रहा है कि छात्र राजनीति से शुरू हुआ डीके शिवकुमार का सफर राज्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी तक पहुंचने वाला है। पार्टी समर्थकों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में संगठन और सरकार दोनों को मजबूती मिलेगी।
