उन्नाव में आइसक्रीम फैक्ट्रियों पर छापा, कई खामियां मिलीं
उन्नाव आइसक्रीम फैक्ट्री को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जिले में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत चार आइसक्रीम फैक्ट्रियों पर छापेमारी की गई। जांच के दौरान कई जगह गंदगी और पंजीकरण संबंधी खामियां मिलीं, जिसके बाद विभाग ने संचालकों को नोटिस जारी किए हैं।
उन्नाव आइसक्रीम फैक्ट्री जांच के दौरान अधिकारियों ने आइसक्रीम, कुल्फी और आइसकैंडी के नमूने भी लिए। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। खाद्य विभाग का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सहायक आयुक्त खाद्य प्रियंका सिंह के निर्देश पर यह अभियान चलाया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने सबसे पहले सैद अब्बासपुर स्थित मेसर्स यशी आइसक्रीम इकाई पर छापा मारा। यहां निर्माण स्थल पर साफ-सफाई की स्थिति खराब मिली। इसके अलावा पंजीकरण में भी खामियां पाई गईं।
उन्नाव आइसक्रीम फैक्ट्री जांच में यह भी सामने आया कि कई उत्पादों के डिब्बों पर बैच नंबर और पैकिंग तिथि अंकित नहीं थी। अधिकारियों ने इस पर नाराजगी जताते हुए संचालक को सुधार के लिए नोटिस जारी किया। टीम ने यहां से चार आइसक्रीम के नमूने भी एकत्र किए।
कब्बाखेड़ा स्थित मेसर्स वर्मा फूड प्रोडक्ट से कुल्फी और आइसकैंडी के सैंपल लिए गए। वहीं बांगरमऊ स्थित मेसर्स पवन आइसक्रीम और नवाबगंज की मेसर्स मदर्स आइसक्रीम इकाई में भी गंदगी मिलने पर विभाग ने नोटिस जारी किए हैं।
उन्नाव आइसक्रीम फैक्ट्री अभियान के दौरान अधिकारियों ने खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए। विभाग का कहना है कि गर्मी के मौसम में आइसक्रीम और ठंडे खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में गुणवत्ता और साफ-सफाई सुनिश्चित करना जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम में आशीष वर्मा, उपासना साह, अनिल कुमार कटियार, पल्लवी शर्मा, आकांक्षा जायसवाल और रूचि बाजपेयी शामिल रहीं। अधिकारियों ने कहा कि जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।
उन्नाव आइसक्रीम फैक्ट्री मामले के बाद स्थानीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि गर्मियों में आइसक्रीम और कुल्फी का सेवन ज्यादा होता है, इसलिए फैक्ट्रियों में साफ-सफाई और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन न करने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद यदि नमूनों में गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित फैक्ट्री संचालकों पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
