बस्ती में गोसेवा आयोग उपाध्यक्ष पर मारपीट का आरोप
गोसेवा आयोग विवाद को लेकर बस्ती में बड़ा मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल पर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है। पीड़ित पक्ष ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद शहर में चर्चा तेज हो गई है।
गोसेवा आयोग विवाद उस समय सामने आया जब बस्ती शहर के तुरकहिया मोहल्ले निवासी विवेक त्रिपाठी ने एसपी कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि महेश शुक्ल और उनके परिवार के कुछ सदस्यों ने उनके परिवार के साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट की।

पीड़ित विवेक त्रिपाठी का आरोप है कि घटना के दौरान उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी गई। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद परिवार में दहशत का माहौल है। पीड़ित ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है।
गोसेवा आयोग विवाद से जुड़ा एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर वायरल बताया जा रहा है। हालांकि वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और शिकायत दोनों की जांच की जा रही है। मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी।
शहर कोतवाल मोतीचंद ने बताया कि पीड़ित की तहरीर प्राप्त हो चुकी है। पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों से जानकारी जुटाई जा रही है।
गोसेवा आयोग विवाद के बाद स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति पर इस तरह के आरोप लगना गंभीर मामला है। वहीं पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपी प्रभावशाली होने के कारण उन्हें निष्पक्ष न्याय मिलने को लेकर चिंता है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया गया है कि मामले में किसी तरह का दबाव काम नहीं करेगा। अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर कार्रवाई होगी।
गोसेवा आयोग विवाद फिलहाल बस्ती शहर में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। इंटरनेट मीडिया पर भी इस मामले को लेकर लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इस मामले ने एक बार फिर सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही और कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।
