Wednesday, June 10, 2026

गोरखपुर में मौसम की मार से टेराकोटा शिल्पकार परेशान

गोरखपुर टेराकोटा शिल्पकार इन दिनों दीपावली और दशहरा के बड़े ऑर्डर पूरे करने में जुटे हैं। अलग-अलग राज्यों से मिल रहे ऑर्डर के चलते कारीगरों का काम तेजी से चल रहा है। हालांकि बदलते मौसम ने उनकी चिंता भी बढ़ा दी है। आंधी और बारिश की वजह से मिट्टी से बनी कलाकृतियों के खराब होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

गोरखपुर टेराकोटा शिल्पकारों का कहना है कि कच्ची कलाकृतियों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त बड़े गोदाम नहीं हैं। ऐसे में मौसम खराब होने पर भारी नुकसान की आशंका बनी रहती है। कई शिल्पकार खुले स्थानों में मिट्टी के उत्पाद सुखाते हैं, जहां तेज बारिश और आंधी से सामान खराब हो सकता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रोत्साहन और एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल होने के बाद गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों की मांग काफी बढ़ी है। अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली और राजस्थान समेत कई शहरों से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। दीपावली और दशहरा को देखते हुए बड़ी संख्या में सामान पहले ही भेजा जा चुका है।

गोरखपुर टेराकोटा शिल्पकार अभी दिन-रात मेहनत कर विभिन्न कलाकृतियों को तैयार कर रहे हैं। धूपदानी, पान दीपक, कढ़ाही, हाथी दीप और घोड़े जैसी मिट्टी की कलाकृतियों की बाजार में अच्छी मांग है। गुलरिहा क्षेत्र के राजन प्रजापति ने बताया कि वह अब तक छह छोटे ट्रकों में सामान भेज चुके हैं।

शिल्पकारों का कहना है कि मानसून शुरू होने के बाद काम और मुश्किल हो जाएगा। मिट्टी के उत्पादों को सूखने में अधिक समय लगता है। अगर लगातार बारिश हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। यही वजह है कि अभी से अधिक से अधिक सामान तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

मौसम की अनिश्चितता के कारण कारीगर लगातार मोबाइल पर मौसम संबंधी अपडेट भी देख रहे हैं। सोमवार रात खराब मौसम की चेतावनी मिलने के बाद कई शिल्पकारों ने खुले में रखी कच्ची कलाकृतियों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया। इससे उन्हें बड़े नुकसान से राहत मिली।

गोरखपुर टेराकोटा शिल्पकारों का कहना है कि अगर बड़े गोदाम और बेहतर सुविधाएं मिल जाएं तो उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल सीमित संसाधनों में ही कारीगर लगातार मेहनत कर रहे हैं। कई परिवार पूरी तरह इसी काम पर निर्भर हैं और त्योहारों का सीजन उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है।

रविंद्र प्रजापति, नागेंद्र, कृष्ण मुरारी, सूरज निषाद, संध्या देवी और रमावती समेत कई कारीगरों ने बताया कि आंधी और बारिश का सिलसिला बढ़ने पर मिट्टी की कलाकृतियों को तैयार करना मुश्किल हो जाएगा। इससे ऑर्डर समय पर पूरा करने में भी परेशानी आ सकती है।

गोरखपुर टेराकोटा शिल्पकारों की मेहनत अब देश के कई बड़े शहरों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में मौसम की चुनौती के बीच भी कारीगर अपने पारंपरिक शिल्प को बचाए रखने और समय पर ऑर्डर पूरे करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

 

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