Wednesday, June 10, 2026

पानी बर्बाद किया तो लगेगा जुर्माना, पालिका सख्त

धामपुर (बिजनौर)। भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर को देखते हुए नगर पालिका धामपुर अब अलर्ट मोड पर आ गई है। पानी की लगातार हो रही बर्बादी को रोकने के लिए पालिका प्रशासन ने सख्त अभियान शुरू किया है। अब पानी की बर्बादी करने वालों पर 500 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

पानी की बर्बादी रोकने के लिए पालिका प्रशासन ने लोगों से जिम्मेदारी निभाने की अपील भी की है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों में कई इलाकों में पेयजल संकट गहरा जाता है। इसके बावजूद कुछ लोग लापरवाही से बड़ी मात्रा में पानी बहा देते हैं, जिससे स्थिति और खराब होती है।

पालिकाध्यक्ष चौधरी रवि कुमार सिंह ने बताया कि हर साल गर्मी के मौसम में पानी की समस्या बढ़ जाती है। इसके बाद भी कई लोग पानी बचाने के बजाय उसकी बर्बादी करते हैं। उन्होंने कहा कि जिन घरों में नगर पालिका के पानी का कनेक्शन है या सबमर्सिबल पंप लगे हैं, वहां अक्सर पानी व्यर्थ बहता देखा जा रहा है।

उन्होंने बताया कि कई लोग घरों की टंकी भरने के लिए मोटर चलाकर छोड़ देते हैं। टंकी भरने के बाद भी मोटर बंद नहीं की जाती, जिससे हजारों लीटर पानी नालियों में बह जाता है। इसके अलावा वाहन धोने और घरों के बाहर सफाई के दौरान भी बड़ी मात्रा में पानी खर्च किया जाता है।

पालिका प्रशासन ने ऐसे लोगों पर निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। अभियान के तहत पानी की बर्बादी करते पाए जाने पर पहले चेतावनी दी जाएगी। दोबारा गलती मिलने पर जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माने की राशि 500 रुपये से शुरू होकर 5000 रुपये तक हो सकती है।

पानी की बर्बादी से जुड़ी शिकायतें अब आम लोग भी कर सकेंगे। नगर पालिका ने लोगों से अपील की है कि अगर कहीं पानी व्यर्थ बहता दिखाई दे तो उसका वीडियो या फोटो प्रशासन को भेजें। शिकायत मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पालिका अधिकारियों का कहना है कि पानी बचाना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। तेजी से बढ़ती गर्मी और कम होते जलस्तर को देखते हुए जल संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है। यदि अभी से सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले समय में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है।

पानी की बर्बादी रोकने के इस अभियान को लेकर स्थानीय लोगों में भी चर्चा है। कई लोगों ने पालिका के फैसले का समर्थन किया है और इसे जरूरी कदम बताया है। प्रशासन का मानना है कि सख्ती और जनजागरूकता दोनों के जरिए ही पानी बचाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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