Wednesday, June 10, 2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 6 साल बाद पेंशन संशोधन पर रोक

 प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्ति के छह साल बाद पेंशन दोबारा तय करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) झांसी से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि शासनादेश और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत आदेश कैसे जारी किया गया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट पेंशन मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने की। यह आदेश कुंवर सिंह द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बीएन सिंह राठौर ने पक्ष रखा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 तय की है।

मामले के अनुसार, याची की पेंशन को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झांसी ने 3 और 10 दिसंबर 2025 के आदेशों के जरिए अंतिम वेतन के आधार पर दोबारा निर्धारित कर दिया था। इसके बाद पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की गई। याचिकाकर्ता ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने दलील दी कि 16 जनवरी 2007 के शासनादेश में स्पष्ट प्रावधान है। इसके अनुसार, सेवानिवृत्ति से 34 महीने पहले हुई वेतन निर्धारण की गलती को बाद में सेवानिवृत्ति लाभ तय करने के लिए नहीं खोला जा सकता। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सुशील कुमार सिंघल मामले में भी इसी प्रकार का सिद्धांत तय किया जा चुका है।

कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए पेंशन पुनर्निर्धारण के आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही एसएसपी झांसी से यह स्पष्ट करने को कहा कि शासनादेश और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ऐसे आदेश क्यों पारित किए गए। अदालत ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट पेंशन मामले को लेकर अब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यह फैसला भविष्य में पेंशन पुनर्निर्धारण से जुड़े मामलों पर असर डाल सकता है। खासतौर पर उन मामलों में, जहां लंबे समय बाद वेतन या पेंशन में बदलाव किया जाता है।

इस आदेश से फिलहाल याचिकाकर्ता को राहत मिली है। वहीं, अगली सुनवाई में शासनादेश और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों की विस्तार से समीक्षा होने की संभावना है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला पेंशन नियमों की व्याख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

You may also like