महाराष्ट्र में सख्ती बढ़ेगी, यौन अपराधियों को पैरोल बंद?
महाराष्ट्र में यौन अपराध कानून को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार अब ऐसे अपराधियों के खिलाफ और सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। खासतौर पर पैरोल सिस्टम को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया जा रहा है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यौन अपराध कानून को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि ऐसा कड़ा कानून तैयार किया जाए, जिसमें यौन अपराधियों को किसी भी स्थिति में पैरोल न मिल सके। यह फैसला राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में 80 से 90 प्रतिशत मामलों में आरोपी पहले भी इसी तरह के अपराध कर चुके होते हैं। ऐसे में जब उन्हें पैरोल मिलती है, तो वे बाहर आकर फिर से अपराध करते हैं। इस प्रवृत्ति को रोकना बेहद जरूरी है।
सरकार का मानना है कि मौजूदा पैरोल व्यवस्था में खामियां हैं। इसी वजह से अपराधी इसका फायदा उठा लेते हैं। इसलिए अब कानूनी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है। नया प्रस्ताव इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब महाराष्ट्र सरकार ने ऐसा कदम उठाया है। वर्ष 2014 से 2019 के बीच भी इसी तरह का कानून लागू किया गया था। उस समय यौन अपराधियों को पैरोल देने पर रोक लगाई गई थी। लेकिन बाद में न्यायालय ने इस कानून को निरस्त कर दिया था।
इस बार सरकार पहले की गलतियों से सीख लेते हुए नया मसौदा तैयार कर रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवैधानिक प्रावधानों का पूरा ध्यान रखें। साथ ही, न्यायालय के पुराने फैसलों का अध्ययन कर मजबूत कानून तैयार करें, ताकि यह कानूनी चुनौती झेल सके।
हाल ही में पुणे जिले के भोर तहसील में सामने आए एक दर्दनाक मामले ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। एक 65 वर्षीय आरोपी पर चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या का आरोप है। जांच में सामने आया कि आरोपी पहले भी ऐसे अपराधों में शामिल था और पैरोल के दौरान ही उसने यह वारदात की।
इस घटना ने राज्य में पैरोल व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके बाद सरकार पर सख्त कदम उठाने का दबाव बढ़ा। अब प्रस्तावित कानून से उम्मीद की जा रही है कि ऐसे मामलों पर लगाम लगाई जा सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अपराधियों के मन में डर पैदा कर सकता है। हालांकि, कानून को संतुलित और संवैधानिक बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस कानून को किस रूप में लागू करती है।
