भारत-जापान वार्ता: होर्मुज तनाव पर क्या बनी रणनीति?
वैश्विक हालात के बीच “भारत जापान संबंध” को लेकर अहम कूटनीतिक पहल सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी से बातचीत कर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई इस बातचीत में खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा पर मंथन किया गया। मौजूदा हालात को देखते हुए “भारत जापान संबंध” में रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
इस बातचीत के दौरान जापानी विदेश मंत्री ने अमेरिका-ईरान तनाव में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इसके जवाब में एस. जयशंकर ने उनके समर्थन के लिए आभार जताया और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर बल दिया।
“भारत जापान संबंध” के तहत दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर सहमति जताई। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का उद्देश्य इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना है। जापान के विदेश मंत्रालय ने भी इस वार्ता की पुष्टि की है।
इससे पहले “भारत जापान संबंध” के साथ-साथ भारत ने मॉरीशस के साथ भी अपने रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। जयशंकर ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम से मुलाकात कर स्वास्थ्य, शिक्षा और तकनीकी सहयोग पर चर्चा की।
बैठक में समुद्री सुरक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा पश्चिम एशिया के हालात और उनके वैश्विक प्रभाव पर भी विचार-विमर्श किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा रहा है। “भारत जापान संबंध” और अन्य साझेदार देशों के साथ सहयोग से क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, यह वार्ता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
