बिहार में CM सस्पेंस: मंत्रिमंडल गणित में फंसा फैसला
बिहार में Bihar cabinet politics को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। नई सरकार के गठन को लेकर अभी तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है। दिल्ली और पटना के बीच लगातार मंथन जारी है, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनके इस्तीफे की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद ही नई सरकार के गठन का रास्ता साफ होगा। हालांकि, कब तक यह प्रक्रिया पूरी होगी, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है।
Bihar cabinet politics के तहत सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। भाजपा और जदयू के बीच शक्ति संतुलन को लेकर गहन चर्चा चल रही है। भाजपा इस बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, ऐसे में मुख्यमंत्री पद पर उसका दावा मजबूत माना जा रहा है।
मंत्रिमंडल के संभावित फॉर्मूले पर नजर डालें तो कुल मंत्रियों की संख्या 33 से 36 तक जा सकती है। इसमें भाजपा के 15 से 17 और जदयू के 14 से 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं सहयोगी दलों जैसे लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो को भी सीमित प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है।
जदयू की कोशिश है कि वह गृह मंत्रालय और विधानसभा अध्यक्ष जैसे अहम पद अपने पास रखे। पहले भी नीतीश कुमार गृह विभाग अपने पास रखते रहे हैं। ऐसे में इस बार भी पार्टी इन विभागों को लेकर दबाव बना रही है।
वहीं, डिप्टी सीएम पद को लेकर भी खींचतान जारी है। भाजपा के पास फिलहाल दो उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन जदयू भी इस पद पर दावा ठोक सकता है। संभावित नामों में निशांत कुमार और विजय चौधरी की चर्चा तेज है।
Bihar cabinet politics में एक और अहम पहलू यह है कि किन पुराने मंत्रियों को दोबारा मौका मिलेगा और किन्हें बाहर किया जाएगा। हाल ही में जिन मंत्रियों पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे, उनके प्रदर्शन की समीक्षा की जा रही है।
विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। जदयू इस पद को अपने खाते में लेना चाहता है, लेकिन भाजपा इसके पक्ष में नहीं दिख रही। भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार के पद पर बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री पद को लेकर है। कई नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय और अन्य नेता शामिल हैं। हालांकि, भाजपा की रणनीति को देखते हुए किसी नए चेहरे को भी आगे लाया जा सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि Bihar cabinet politics इस बार काफी जटिल हो गई है। गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। यही कारण है कि अंतिम फैसला लेने में देरी हो रही है।
अब सबकी नजरें दिल्ली में बैठे शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में ही यह साफ होगा कि बिहार की सत्ता किसके हाथ में जाएगी और नया मंत्रिमंडल कैसा होगा।
