Saturday, April 11, 2026

किडनी कांड में बड़ा खुलासा, लिवर ट्रांसप्लांट गिरोह का जाल

कानपुर में सामने आए “अंग तस्करी गिरोह” मामले ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है। किडनी ट्रांसप्लांट के अवैध नेटवर्क की जांच के दौरान अब लिवर ट्रांसप्लांट से जुड़े नए खुलासे हुए हैं। पुलिस को टेलीग्राम पर दो और ग्रुप मिले हैं, जिनमें सैकड़ों लोग जुड़े थे।

जांच के अनुसार, “अंग तस्करी गिरोह” केवल किडनी ही नहीं, बल्कि लिवर ट्रांसप्लांट भी कराता था। एक टेलीग्राम ग्रुप में किडनी डोनर से जुड़ी जानकारी साझा की जाती थी, जबकि दूसरे ग्रुप में लिवर डोनर और ट्रांसप्लांट से संबंधित गतिविधियां संचालित हो रही थीं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एक ग्रुप में 643 सदस्य थे, जिनमें से बड़ी संख्या किडनी एजेंटों की थी। वहीं, लिवर ट्रांसप्लांट से जुड़े तीसरे ग्रुप में 700 से ज्यादा सदस्य जुड़े हुए थे। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि “अंग तस्करी गिरोह” का नेटवर्क काफी बड़ा और संगठित था।

इस मामले में पुलिस ने बागपत निवासी परवेज सैफी को गिरफ्तार किया है, जो गिरोह का अहम सदस्य बताया जा रहा है। उसके पास से 9.05 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिससे जांच का दायरा और बढ़ गया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का सरगना डॉ. रोहित बेहद शातिर तरीके से काम करता था। वह अलग-अलग लोगों से संपर्क करने के लिए चार मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करता था और हर ट्रांसप्लांट के बाद सिम कार्ड बदल देता था, ताकि पुलिस उसकी लोकेशन ट्रैक न कर सके।

“अंग तस्करी गिरोह” के नेटवर्क में डॉक्टर, दलाल, अस्पताल कर्मी और एजेंट शामिल थे। ऑपरेशन के दौरान टीम को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता था, ताकि किसी बाहरी व्यक्ति को संदेह न हो। कुछ लोग अस्पताल के अंदर रहते थे, जबकि अन्य बाहर निगरानी करते थे।

पुलिस अब सभी आरोपियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है। साथ ही, नए संदिग्ध नंबरों की पहचान कर उनके आधार पर अन्य जिलों में भी छापेमारी की तैयारी की जा रही है।

जांच एजेंसियों को शक है कि यह गिरोह केवल किडनी और लिवर तक सीमित नहीं था, बल्कि अन्य मानव अंगों की तस्करी में भी शामिल हो सकता है। इस दिशा में भी जांच तेज कर दी गई है।

इस पूरे मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। संबंधित अस्पतालों के लाइसेंस भी निलंबित कर दिए गए हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस “अंग तस्करी गिरोह” से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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