Saturday, April 11, 2026

बंगाल चुनाव 2026: कांग्रेस की वापसी या बिगाड़ेगी समीकरण?

पश्चिम बंगाल में Bengal election Congress को लेकर दिलचस्प स्थिति बनती दिख रही है। 2026 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकेले दम पर मैदान में उतरकर सियासी समीकरणों को बदलने की कोशिश की है। लंबे समय से कमजोर रही पार्टी इस बार अपनी खोई जमीन वापस पाने के इरादे से चुनाव लड़ रही है।

कांग्रेस ने इस बार 294 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। खास बात यह है कि पार्टी ने किसी भी गैर-राजनीतिक चेहरे को टिकट नहीं दिया है। इसके बजाय पुराने और भरोसेमंद नेताओं पर दांव लगाया गया है, जिससे कार्यकर्ताओं में नया उत्साह देखने को मिल रहा है।

Bengal election Congress रणनीति में अधीर रंजन चौधरी और मौसम नूर जैसे नेताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। अधीर रंजन चौधरी को उनके मजबूत गढ़ बहरमपुर से टिकट दिया गया है। वहीं, मालदा क्षेत्र में पकड़ मजबूत करने के लिए मौसम नूर को मैदान में उतारा गया है।

अगर पिछले चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें, तो कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार गिरता गया है। 1977 के बाद से पार्टी कभी भी राज्य की सत्ता में वापसी नहीं कर पाई। 2021 के चुनाव में तो कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल सकी थी। ऐसे में 2026 का चुनाव पार्टी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

इस बार कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों में सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। पार्टी ने बड़ी संख्या में दलित, मुस्लिम और महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। यह रणनीति सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Bengal election Congress भले ही सत्ता में वापसी न कर पाए, लेकिन वह चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है। खासकर मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे क्षेत्रों में इसका असर देखने को मिल सकता है।

बंगाल की राजनीति में कांग्रेस की गिरावट का एक बड़ा कारण तृणमूल कांग्रेस का उदय रहा है। ममता बनर्जी के अलग पार्टी बनाने के बाद कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक धीरे-धीरे खिसकता गया। इसके बाद भाजपा के उभार ने कांग्रेस की स्थिति और कमजोर कर दी।

अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस बार अपना खाता खोल पाएगी या फिर सिर्फ अन्य दलों का खेल बिगाड़ने तक सीमित रह जाएगी। Bengal election Congress की रणनीति से यह तय होगा कि चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है।

कुल मिलाकर, 2026 का बंगाल चुनाव कांग्रेस के लिए परीक्षा की घड़ी है। यह चुनाव तय करेगा कि पार्टी राज्य की राजनीति में वापसी कर पाती है या फिर हाशिये पर ही बनी रहती है।

 

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