Saturday, April 11, 2026

कफ सिरप तस्करी केस में SIT सख्त, काले धन का जाल बेनकाब

वाराणसी में “कफ सिरप तस्करी” मामले में जांच एजेंसियों ने शिकंजा और कस दिया है। भगोड़े सरगना शुभम जायसवाल और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों पर विशेष जांच दल (SIT) की पैनी नजर बनी हुई है। मामले में पिछले तीन साल के वित्तीय और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, “कफ सिरप तस्करी” से अर्जित काले धन को अलग-अलग कारोबार में खपाया गया। एसआईटी अब रजिस्ट्री कार्यालयों से शुभम, उसके रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर हुई संपत्ति खरीद की जांच कर रही है। खासतौर पर रियल एस्टेट, होटल, कैटरिंग और साड़ी कारोबार से जुड़े लोगों को जांच के दायरे में लिया गया है।

जांच में सामने आया है कि शुभम जायसवाल ने अवैध कमाई को वैध बनाने के लिए कई सेक्टरों में निवेश किया। उसने युवाओं की एक टीम बनाकर वाराणसी, लखनऊ, नोएडा, धनबाद, कोलकाता, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड तक नेटवर्क फैलाया। इस नेटवर्क के जरिए तस्करी का कारोबार लगातार बढ़ाया गया।

एसआईटी को यह भी जानकारी मिली है कि शुभम के पास कई लग्जरी गाड़ियां थीं, जिनके नंबर 1111 जैसे खास पैटर्न में थे। इन वाहनों के जरिए भी लेनदेन और गतिविधियों की जांच की जा रही है। साथ ही, हवाला के जरिए पैसे के ट्रांजैक्शन के भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, शहर के कुछ बड़े होटल और कैटरिंग कारोबारी भी इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। आरोप है कि इन कारोबारियों ने काले धन को अपने व्यवसाय में खपाया और तेजी से संपत्ति अर्जित की। महमूरगंज, चौकाघाट और चांदपुर जैसे क्षेत्रों में खरीदी गई संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में भी कुछ नाम सामने आए हैं। एक कैटरिंग कारोबारी को नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद वह पूछताछ के लिए लखनऊ स्थित कार्यालय पहुंचा। हालांकि, मामले को लेकर आगे की कार्रवाई जारी है।

“कफ सिरप तस्करी” केस में रियल एस्टेट निवेश की भी बड़ी परत खुल रही है। बताया जा रहा है कि शुभम ने करोड़ों रुपये एक रियल एस्टेट कंपनी में निवेश किए थे। इस मामले में कंपनी से जुड़े लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

इसके अलावा, एसआईटी को यह भी संदेह है कि शुभम की फरारी में उसके करीबियों की अहम भूमिका रही है। फेसटाइम कॉल के जरिए लगातार संपर्क बनाए रखने की बात भी सामने आई है। पहले गिरफ्तार किए गए हवाला कारोबारी ने भी इस नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि शुभम कई प्रभावशाली लोगों के लिए फाइनेंसर के रूप में काम करता था। चुनावी गतिविधियों में भी उसका प्रभाव देखने को मिला। कई जिलों में उसके करीबी चुनाव लड़ने की तैयारी में थे और भारी धनराशि का उपयोग किया जा रहा था।

कुल मिलाकर, “कफ सिरप तस्करी” मामला अब सिर्फ ड्रग्स तक सीमित नहीं रह गया है। यह काले धन, रियल एस्टेट, हवाला और राजनीतिक फंडिंग तक फैले एक बड़े नेटवर्क के रूप में सामने आ रहा है। आने वाले दिनों में जांच और तेज होने की संभावना है।

You may also like